Thursday, January 22, 2015

अक्षत मंथन की
गूंज
दिन देखा हर सीप ने..
सुना
महाप्रलय का भय..
थरथराया
समूचा नक्षत्र संसार..
विष
मगर एक ही महामानव पीता है
ॐ.......
श्री......

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