Thursday, January 22, 2015

कोई किताब जब लाते हो तुम मेरे लिये
उस पर हस्ताक्षर करते हो अपने होठों से
तब के समय से लेकर अब तक वो हस्ताक्षर
मेरी नसों में एक नया ईश्वर रच रहे हैं....
मुझसे पढी नही जाती अब कोई और किताब...

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