Thursday, January 22, 2015

वो रात भर बैठा रहा 
उसके दिल पर दस्तक देता
कॉफी के घूंट गले में उतारता
कि शायद कोई होगी बेज़ार सी मुशकिल
या हो भी सकता है
कि नींद ने अपने आगोश में लिया हो उसको
और यहाँ रात है कि ढलने का नाम नही लेती...

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